आवाज़ आज दबी है
साँस भी है मद्धम
रूमाल पकड़े बैठा है
नुख़्ता लगाना भी
भूल गया
लगता है आज
शायर को ज़ुकाम हुआ है|
कल रात
आरज़ू का कम्बल
कोई ले गया उसका
ऊपर से ओस पढ़ी
होगी सर पे
आँखें हैं चढ़ी हुई
नाक भी लाल है अब
लगता है आज
शायर को ज़ुकाम हुआ है|
दोस्त-यार, हक़ीम
आ रहे हैं
थोड़ा मरहम और
vaporub लगा रहे हैं
नज़ला सर ना चढ़े
उधार की आरज़ू का कम्बल
ओढ़ा रहे हैं
क्यूंकि आज
शायर को ज़ुकाम हुआ है|