Thursday, September 3, 2026

आज शायर को ज़ुकाम हुआ है

आवाज़ आज दबी है 

साँस भी है मद्धम 

रूमाल पकड़े बैठा है 

नुख़्ता लगाना भी 

भूल गया 

लगता है आज 

शायर को ज़ुकाम हुआ है| 


कल रात 

आरज़ू का कम्बल 

कोई ले गया उसका 

ऊपर से ओस पढ़ी 

होगी सर पे 

आँखें हैं चढ़ी हुई 

नाक भी लाल है अब 

लगता है आज 

शायर को ज़ुकाम हुआ है| 


दोस्त-यार, हक़ीम 

आ रहे हैं 

थोड़ा मरहम और 

vaporub लगा रहे हैं 

नज़ला सर ना चढ़े 

उधार की आरज़ू का कम्बल 

ओढ़ा रहे हैं 

क्यूंकि आज  

शायर को ज़ुकाम हुआ है|